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सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का रहस्य I The Secret Of Complete Physical & Mental Health In Hindi I Purbajon Ki Gaston Ko Kholen I Swath Jeevan Payen

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सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का रहस्य   हम सभी लम्बी उम्र के साथ-साथ पूर्ण स्वस्थ, और तनाव रहित, तथा बिना किसी दर्द को लिए जीवन जी सकते हैं I  हाँ ! यह कोई कौरी कल्पना नहीं-- हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों, और हमारे प्राचीन ग्रंथों के वैज्ञानिक प्रमाणित सत्य हैं; जिनको अपनाकर, और स्वयँ के अन्तर्मन के विश्वास, तथा मानसिक भावनाओं को बदलकर; हम श्वासों के माध्यम से चेतना जाग्रत्त करके हर पुराने दुःख-दर्दों, अन्तर-शरीर में दबे क्रोध तथा कुंठाओं-अवसादों को जीवन से सदा सदा के लिए दूर कर सकते हैं I   साथियों समझने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि-- आज आपके जो भी डर, दर्द और चिंताएँ या मानसिक और शारीरिक दिक्कतें हैं-- उनको आपने जन्म नहीं दिया है-- ये तो आपके पूर्वजों के दुःख, दर्द, क्रोध और अवसाद हैं-- जिनको आप आज भी जाने-अनजाने ढ़ोते आ रहे हो I  ये आपके पूर्वजों द्वारा झेले गए वे शारीरिक और मानसिक डर, क्रोध और दर्द हैं-- जिनको पूर्वजों ने झेला, और लम्बे समय तक महसूस किया था | जिनके कारण उनके शरीर में इनसे बचने के लिए शारीरिक परिवर्तन हो गए थे-- जिनकी उस समय ...

आज में रहना सीखो l वर्तमान में जिएँ l कैसे अतीत को पीछे छोड़ें l चिंता-मुक्त जीवन के सूत्र

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  आज में रहना सीखो ! ( वर्तमान की शक्ति को पहचानो ) वर्तमान में रहकर चिंता-मुक्त रहें  "तनाव-मुक्त रहने का मूल-मंत्र ही वर्तमान में रहकर सर्वोत्तम कर्म करते रहना ही है।" "आज को सर्वक्ष्रेष्ठ बना लो; तो आपका भविष्य स्वतः ही सुखमय, सफ़ल बनता चला जाएगा।" “हमारे जीवन का अस्तित्व ही वर्तमान में होता है। चलता हुआ जीवन ही वर्तमान जीवन है; यही आगे चलकर हमारा भविष्य बनेगा।“ "ख़ुशी के श्रोत आपके भीतर ही हैं। अगर हम विचारशील, उदार भाव रखते हैं, भावनाओं को नियंत्रित और संयमित करने में सक्षम हैं तथा साथ ही अन्दर से शाँत और आज में जीते हैं, तो जीवन की वास्तविक ख़ुशी अपने आप आ जाती है।" “ज्यादातर हम अच्छी-अच्छी बातों, घटनाओ, लाभों पर ध्यान ना देकर किसी एक अतीत की भूल या हानि को जिंदगी भर याद कर-कर के पछताते, अफसोस जताते और दुखी होते रहते हैं। इससे हमारी खुशियाँ गायब हो जाती हैं, हम हर क्षण उदास और तनाब में रहने के आदी हो जाते हैं। इनके कारण जीवन निराश और अर्थहीन लगने लग जाता है। हमें इसे बदलना होगा, तभी हम ख़ुशी के साथ प्रगत्ति के पथ पर आगे बढ़ सकते हैं। हमें ...