सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का रहस्य I The Secret Of Complete Physical & Mental Health In Hindi I Purbajon Ki Gaston Ko Kholen I Swath Jeevan Payen
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| वर्तमान में रहकर चिंता-मुक्त रहें |
"तनाव-मुक्त रहने का मूल-मंत्र ही वर्तमान में रहकर
सर्वोत्तम कर्म करते रहना ही है।"
"आज को सर्वक्ष्रेष्ठ बना लो; तो आपका भविष्य स्वतः
ही सुखमय, सफ़ल बनता चला जाएगा।"
“हमारे जीवन का अस्तित्व ही वर्तमान में होता है। चलता
हुआ जीवन ही वर्तमान जीवन है; यही आगे चलकर हमारा भविष्य बनेगा।“
"ख़ुशी के श्रोत आपके भीतर ही हैं। अगर हम विचारशील,
उदार भाव रखते हैं, भावनाओं को नियंत्रित और संयमित करने में सक्षम हैं तथा साथ ही
अन्दर से शाँत और आज में जीते हैं, तो जीवन की वास्तविक ख़ुशी अपने आप आ जाती है।"
“ज्यादातर हम अच्छी-अच्छी बातों, घटनाओ, लाभों पर ध्यान
ना देकर किसी एक अतीत की भूल या हानि को जिंदगी भर याद कर-कर के पछताते, अफसोस जताते
और दुखी होते रहते हैं। इससे हमारी खुशियाँ गायब हो जाती हैं, हम हर क्षण उदास और तनाब
में रहने के आदी हो जाते हैं। इनके कारण जीवन निराश और अर्थहीन लगने लग जाता है।
हमें इसे बदलना होगा, तभी हम ख़ुशी के साथ प्रगत्ति के पथ
पर आगे बढ़ सकते हैं। हमें ध्यान रहना चाहिए कि जो हो गया वह ना तो बदला जा सकता है
और ना ही वह पुनः लोट कर आ सकता है; अतः हमारा चिंता करना मूर्खता ही है।“
“वर्तमान में रहकर सकारात्मक सोच और जीत की आशा के साथ
कार्य करने से हम अतीत की भूलों का अफ़सोस नहीं करते हैं; साथ ही भविष्य के काल्पनिक
डरों से भी बचे रहते हैं। अतः तनवमुक्त रहना है तो वर्तमान में रह कर सोचें और कार्य
करें।
जैसा हम सोचेंगे वैसे ही परिणाम हम ब्रह्माण्ड और अवचेतनमन द्वारा हम ग्रहण करेंगे, अतः भविष्य के काल्पनिक डर ना सोचने से हम बुरा होने से
बचे रह सकते हैं।
जब चिंता रहित होकर निर्णय लेकर वर्तमान लक्ष्यों पर कार्य
करेंगे तो भविष्य स्वतः ही अच्छा होता चला जाएगा। अतः भूत और भविष्य को आधार बनाकर
निर्णय लेने से अच्छा है कि वर्तमान को आधार बनाकर सर्वोत्तम निर्णय लें तथा वर्तमान
पल का सदुपयोग चिंतन-मनन और सर्वोत्तम कार्यों को करने में करें। कभी भी अतीत या भविष्य
की चिंता या दुःख में समय बर्बाद ना करें।“
”जीवन को ख़ुशी और समृद्दि के साथ जीने के लिए स्वस्थ जीवन
जीना आना चाहिए। स्वस्थ और तनाव-रहित जीवन के लिए हमें वर्तमान, अतीत और भविष्य के
बीच संतुलन बनाकर रखना होगा।
हमें जहाँ तक संभव हो वर्तमान में रहते हुए भविष्य की योजनाओं
पर लक्ष्य बनाते हुए कार्य करने चाहिए; लेकिन अभी से इस बात की चिंता ना करें कि हमारे
प्रयास सफल होंगे कि नहीं। इसी प्रकार अतीत की अच्छी और बुरी दोनों प्रकार की बातों
से सबक लेकर वर्तमान में भूलों की पुनरावृत्ति ना हो इस पर कार्य करना चाहिए, साथ ही
अतीत के अनुभवों को वर्तमान कार्यों की प्रगत्ति में उपयोग करना चाहिए; लेकिन अतीत
में जो नहीं कर पाए उन पर पछतावा या दुःख नहीं मानना चाहिए।“
हमें
वर्तमान में रहकर सकारात्मक सोच के साथ निश्चित उद्देश्यों को पाने के लिए लगातार परिश्रम
करना चाहिए लेकिन अतीत और भविष्य की बातों की चिंता कभी नहीं करनी चाहिए।
अगर
वर्तमान को सर्वश्रेष्ठ बना लोगे तो यही आपकी भविष्य की बड़ी सफलता की कामना को भी साकार
कर सकता है। ये सब कुछ हमारे सोचने-समझने के तरीकों पर ही निर्भर करता है।
जीवन में सफलताओं के साथ-साथ ख़ुशी तभी मिलेगी जब जीवन में
हम कुछ समय स्वयँ के लिए और पारिवारिक रिश्तों की ख़ुशी पर भी देंगे।
अतः आज में (वर्तमान में) जिएँ, हर छोटी-छोटी बातों से
जीवन की ख़ुशियाँ बढ़ाते रहें। अच्छे फल की आशा के साथ, ख़ुशी के साथ वर्तमान क्षण में
और आज सर्वश्रेष्ठ कर्म करो; लेकिन अतीत की भूलों पर अफ़सोस और भविष्य की काल्पनिक चिंताओं
में समय व्यर्थ ना करें। अगर मन खुश और एकाग्रः होगा तभी वर्तमान के साथ- साथ भविष्य
की योजनाओं पर अच्छा ध्यान दे पाएँगे।
अतः तनाव-मुक्त जीवन के साथ सफलता पाने के लिए वर्तमान
में रहकर कार्य करें।
हमारे पास इस क्षण मात्र वर्तमान ही अस्तित्व में है। ना
ही अभी अतीत मौजूद है और ना ही भविष्य।
अतीत की पुरानी यादें और भविष्य की कल्पनाओं का वर्तमान
क्षण में कोई अस्तित्व नहीं होता है, ये सब हमारे मन में चल रहा होता है। मात्र वर्तमान
का ही अस्तित्व है; जो अगले पल (क्षण) हमारा भविष्य हो जायेगा। तब यह नया पल उस क्षण
का वर्तमान होगा। जरूरी नहीं आने वाला क्षण हमारे सोच के अनुसार ही होगा; काफी कुछ
परिवर्तन आपको आपकी सोच के विपरीत भी मिलेंगे। अतः अभी से भविष्य की चिंता में डूब
जाना हमारी-आपकी और सभी की मूर्खता ही होती हैं।
हाँ,
अतीत से सबक लेते हुए वर्तमान में रहते हुए भविष्य की योजना बनाना, लक्ष्य निर्धारित
करना जरूरी होता है। इसके बिना हम वर्तमान में भी दिशाहीन होंगे। लेकिन अभी से यह सोचना
और डरना कि हम लक्ष्य प्राप्त करेंगे कि नहीं, डरें कि कितनी बाधाएँ आएँगी, लोग क्या
कहेंगे आदि-आदि सोचने का अभी कोई औचित्य नहीं है।
अतः समय का वर्तमान में रहते हुए अच्छे भविष्य की कामना,
आत्म-विश्वास के साथ भरपूर और सर्वश्रेष्ठ उपयोग करें; तभी सफलता मिलेगी और भविष्य
को भी उज्जवल बना पाओगे। क्योंकि भविष्य की
नींव (foundation) आपका वर्तमान ही है। अगर चिंताओं में वर्तमान में कुछ विशेष
नहीं कर पाए तो आगे भविष्य सर्वश्रेष्ठ हो ही नहीं सकता है और आप कुंठा, आत्मग्लानि,
अफ़सोस की जिंदगी ही झेलते रहोगे।
वर्तमान क्षण में जीने के लिए अतीत में क्या हुआ था?, भविष्य
में क्या होगा?; इस पर चिंता कभी ना करें क्योंकि ऐसा करने का लाभ नहीं है; उल्टा हम
समय बर्बादी के साथ-साथ अपने तन-मन का ही नुकसान कर बैठते हैं।
इनकी बजाय हमारा ध्यान इस बात पर हो कि अभी जो कार्य कर
रहे हैं; उसमें सर्वश्रेष्ठ करें, उसका आनन्द लें और वर्तमान और वर्तमान दिन के हर
क्षण को बेहत्तर बनाने के लिए समय का भरपूर सदुपयोग करें।
अच्छा होगा कि हम अच्छे भविष्य की कामना के साथ वर्तमान
में अच्छे और बड़े लक्ष्यों, उद्देश्यों के साथ लगातार कार्य करके अच्छे-भविष्य का निर्माण
करें।
भविष्य की योजना तो वर्तमान में ही बनाएँ लेकिन अभी चिंता
करना मूर्खता ही होगी। अगर हम भविष्य की कल्पनाओं में ही समय बर्बाद करते रहेंगे तो
कुछ भी हांसिल नहीं होगा। अतः आज कड़ी मेहनत सकारात्मक-दृष्टिकोण के साथ करें; जिसका
सुफ़ल स्वतः ही भविष्य को प्रगत्तिशील बना देगा।
इन्हें भूलना ही उच्चित होगा तथा वर्तमान में अलग तरीके
से काम करके आगे बढ़ना ही होगा।
जो बीत गया उस पर पछताने का कोई मतलब नहीं होता है, उल्टा
ऐसा करके हम स्वयँ के समय और स्वस्थ को नष्ट करते हैं।
तो इस विचार को अभी इसी क्षण त्यागें; क्योंकि ऐसे विचार
आपको कभी भी आगे बढ़ने ही नहीं देंगे। अतः वर्तमान पर ध्यान एकाग्रः करके लोगों पर ध्यान
देना बन्द करके वर्तमान कार्यों में सवश्रेष्ठ सफलता हांसिल करें तभी आप में आत्म-विश्वास
जाग्रत होगा।
लोग क्या कहेंगे या कोई हमारी बदनामी तो नहीं करेगा ऐसे
विचार करना अभी से बन्द करो; इनका कोई लाभ नहीं होगा।
उपरोक्त सभी बातें आपको कभी सफ़ल नहीं होने देंगी। ये सभी
आपके वर्तमान कार्यों, लक्ष्यों पर नकारात्मक प्रभाव ही डालेंगीं। अतः जितना जल्दी
हो इन पर सकारात्मक भाव से विचार करके इनको सोचना और सोच-सोच कर डरना बन्द कर दें।
जीवन को निडरता और साहस के साथ खुशी के साथ जिएँ।
आत्मग्लानि, कुंठा, डर को निकल कर पुराने अच्छे अनुभवों
के आधार पर, पुरानी गलतियों से सबक लेकर नई लक्ष्य आधारित योजना पर ध्यान एकाग्रः करें;
तभी वर्तमान समय का सर्वश्रेष्ठ लाभ ले पाएँगे।
जो
अतीत की बातें अब अर्थहीन हैं और अब होना असंभव है; उन पर सोच कर समय बर्बाद करने से
बचें। भविष्य की अच्छी कल्पना करो लेकिन " भविष्य में सफ़ल होंगे कि नहीं
" ऐसी अर्थहीन बातों पर अभी से डरने से कोई फ़ायदा नहीं होगा। जब भविष्य का निश्चित
समय आएगा तब की परिस्थितियों का आकलन अभी से करना मूर्खता ही होगी; जो कि आपको बैचेन
करके आपके वर्तमान कार्यों पर ध्यान एकाग्रः करने में बाधक होगी। अतः ऐसी बुरी नकारात्मक
सोच को त्याग दें।
हमें
अपने आप को और आज को जानने की जरूरत है। जो भी हमें करना है वह आज ही और जहाँ तक संभव
हो अभी इसी क्षण करना चाहिए।
इंसान ज्यादातर अपने अतीत के दिनों की यादों में या भविष्य
की चिंताओं में ही खोया रहता है; जिसके कारण वह आज का ना तो भरपूर लाभ ले पाता है और
आने वाले कल की चिंता, तनावों के कारण आज की खुशी के छोटे-छोटे पलों को भी महसूस नहीं
कर पाता है और इन्हीं कारणों से मायूस, आत्महीनता, डर के साये में जीकर अपना जीवन बर्बाद
कर बैठता है।
हमें आज की वर्तमान में जीने की शक्ति और स्वयं की शक्ति
पर विश्वास करना चाहिए। हमें अतीत और भविष्य को भूलकर वर्तमान में जीना चाहिए। वर्तमान
को सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए ऐसे उपयोग में लाना चाहिए कि हर परेशानी को सुगमता
से हल करने में सक्षम बन सकें।
हमें
कभी भी स्वयं को किसी से भी कमजोर नहीं समझना चाहिए और ना ही यह मानना चाहिए कि हम
कोई कार्य कर ही नहीं सकते हैं। हमें वर्तमान पर ध्यान देते हुए दृढ़ता के साथ स्वयँ
को बदलने और कठोर परिश्रम करने तथा जोखिमों का सामना बिना आलस, आत्मग्लानि के करने
को तैयार रहना चाहिए। ऐसा करने पर हम मेहनत, लगन के बल पर सब कुछ हांसिल कर सकते हैं।
हमें स्वयँ पर ध्यान देते हुए; स्वयँ की कमजोरियों को दूर
करने के लिए जैसे भी और जहाँ से भी संभव हो सीखकर अपना ज्ञान, कौशल, अनुभव बढ़ाते जाना
चाहिए। ये सब तभी संभव होगा; जब हमें स्वयँ पर अटूट विश्वास होगा।
हम जैसे भी हैं हमें स्वयँ को स्वीकार करना चाहिए, साथ
ही कभी भी स्वयँ की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए। जानना है और सुधारना है तो स्वयँ
को जानो और स्वयँ को उन्नत बनाओ l
हमें भविष्य के बारे में तभी सोचना चाहिए जब इसकी जरूरत
हो। कभी भी अपने बीते हुए कल या आने वाले कल की चिंता में हाथ पर हाथ रखे बैठे नहीं
रहना चाहिए; यह गलत है। ऐसा करने पर हम वर्तमान (आज) को सही तरीके से सदुपयोग नहीं
कर पाएँगे और आज को जीना ही दुभर हो जाएगा।
कोई
जरूरी नहीं कि जो सुबिधा आज हमारे पास है वह कल भी उपलब्ध होगी। अतः कभी अच्छे समय
की प्रतीक्षा में वर्तमान समय को बर्बाद ना करो। जीवन के हर एक वर्तमान क्षण (पल) का
सदुपयोग करो और हर पल की छोटी-छोटी खुशियाँ प्राप्त करते रहें। मन को नियंत्रित रखें
और अपने उद्देश्य, लक्ष्यों से कभी भी ना भटकें। जो भी आप कर रहे हैं उसमें आत्म-संतुष्ट
रहें।
अगर कार्य करते हुए दिक्कतें आएँ तो उन्हें सहर्ष स्वीकार
करते हुए, उनके कारणों पर विचार करते हुए शीघ्र समाधान की दिशा में भी कार्य करके उन्हें
दूर करने के प्रयास करो; लेकिन चिंता कभी ना करो।
जो कल बीत गया अब हम उसे बदल नहीं सकते हैं; तो हमारा चिंता
करना व्यर्थ है। इसी प्रकार आने वाले समय की कोई गारंटी नहीं होती है कि हम जैसा सोच
रहे हैं बैसा ही सब कुछ होगा; अतः आने वाले समय के इन्तज़ार में बैठना मूर्खता होगी।
जो भी या जितना भी संभव हो आज ही कार्य करें तथा कल के इन्तज़ार में वर्तमान पल के लाभों
को ना खोएँ।
स्वयँपर विश्वास करें। ना तो दूसरीं पर निर्भर रहें, ना ही उनकी निर्थक डरी-डरी बातों पर
ध्यान दें।
दूसरों से स्वयँ की तुलना कभी भी ना करें अन्यथा आपका आत्म-विश्वास
गिर सकता है।
हाँ; सफल लोगों की जीवनी से या उनके कार्य करने के तरीकों
को जानना और अपने हिसाब से उनकी अच्छाइयों को अपनाने में कोई बुराई नहीं है।
अगर सुझाव चाहिए तो योग्य, ईमानदार लोगों से ही लो।
हाँ!
बीते हुए कल का आकलन करना या भविष्य की योजना बनाना कभी गलत नहीं होता है; यह हमें
करना ही चाहिए। इसे हम निम्न प्रकार से समझ सकते हैं:--
बीते
हुए कल से हम भूलों, कार्य में आने वाली दिक्कतों, स्वयँ की कमजोरियों का पता लगा सकते
हैं। इनसे सबक लेकर वर्तमान में उन भूलों को दुबारा होने से बच सकते हैं; साथ ही स्वयँ
की कमियों को सुधार सकते हैं। जो भी दिक्कतें आई थीं उनके समाधान खोज सकते हैं।
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