जोखिम (RISKS)
जोखिम लेने से ही हमारी उन्नति के मार्ग बनते हैं और हम विजयी बन सकते हैं ।
हम जो भी कार्य करते हैं , उसमे कोई ना कोई जोखिम अवश्य रहती है। हमारी उन्नत्ति व समृद्धि काफ़ी हद तक हमारी जोखिम उठाने की क्षमता पर ही निर्भर करती है।
जीवन ही संघर्ष का पर्याय है। बिना संघर्ष किये सफलता मिलना मुश्किल है। बड़ी सफलता पाने के लिए लम्बा रास्ता चुनना अच्छा है ओर अधिक संघष तो करना ही होगा। सुगम और छोटा रास्ता और तरीके अपनाने से शीघ्र ख़त्म होने वाली सफलता ही मिलेगी। स्थाई सफलता पानी है तो लम्बा रास्ता और कड़ी मेहनत और बड़े जोखिम तो लेनें ही होंगे।
जीवन में चुनौती तो आएँगी ही ,अगर सफल होना है तो इन चुनौतिओं का निडरता से सामना तो करना ही होगा।
चुनौतियां ही हमें जीवन में आगे बढ़ने की सीख देती है , हम चुनौतिओं के समाधान के लिए कुछ नया सीखते हैं और आगे बढ़ने का मार्ग मिल ही जाता है।
छोटा रास्ता बिना चुनौती का तो होगा , लेकिन यह छोटा रास्ता भविष्य में सफलता की संभावना को कम कर देगा और हमारे प्रयास निरर्थक हो सकते हैं।
लम्बा रास्ता चुनने पर हमें अथक प्रयास तो करने होंगे और संघर्ष भी करने होंगे , लेकिन सफलता स्थाई होगी और संघर्ष के बाद मिली सफलता हमें जीवन की वास्तविक ख़ुशी देगी , जो हमारे आत्मविश्वास को बढाकर और अधिक ऊर्जा के साथ बड़ी सफलता के लिए प्रयास करने की प्रेरणा भी देगी।
जोखिम लेने से बड़ी सफलता मिलना संभव है। कैसे ? जानें
जब हम एक जमे - जमाए कार्य को करते हुए कोई नया कार्य आरम्भ करने की सोचते हैं तो विचार करना कोई बुरी बात नहीं है , परन्तु अगर जीवन में कुछ बड़ा बनना है तो जोखिम तो उठानी ही पड़ेगी।
जोखिम उठाओ लेकिन जोखिम सोच - समझकर और पूरी सूझबूझ के साथ पुर्नविचार के बाद ही लेनी चाहिए। कभी भी जिंदगी के फैसले जल्दवाजी के नहीं होते ,लेकिन जोखिम लेने के डर से और सिर्फ इसी डर से कि अगर हम असफल हो गए तो हमारा जमा-जमाया कार्य भी छूट जायेगा ; अपने वर्तमान कार्य से ही चिपके रहना कोई अच्छी बात नहीं है। हम तुलनात्मक विश्लेषण कर सकते हैं और हम हमारी क्षमताओं , अनुभव और हमारी वर्तमान परिस्थितिओं की समझ रखते हुए हम तुलनात्मक विश्लेषण करके अंतिम सकारात्मक निर्णय ले सकते हैं।
जोखिम में हमें कुछ बुरा होने की संभावना दिखती है ,लेकिन सोची-समझी जोखिम लेने से ही हम कुछ बड़ा करने की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
अगर हम साहस के साथ व आत्मविश्वास के साथ जोखिम उठाते जायेंगे तो बड़ी से बड़ी सफलता मिलना मुश्किल नहीं होगी , अगर हम भविष्य के कपोल काल्पनिक भय और शंकाओं के कारणवश जोखिम लेने से डरेंगे तो असफलता ही हमारी नियत्ति बन जाएगी और हम कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
अगर हम हमारे मन के डर के कारण , लोगों की टिप्पणियों , राय के कारण कभी जोखिम उठाएंगे ही नहीं तो हम कभी भी कुछ नया कर ही नहीं पाएंगे।
अपने कार्यों के नकारात्मक परिणामों के विषय में हमारी निश्चितता की भावना ही हमें जोखिम उठाने से रोकती है।
जोखिम तथा परिवर्तन , दोनों ही जीवन में निरंतर चलते रहते हैं।
हिचकिचाहट की भावना हमारे मन के डर और हमारी हीन भावनाओं का परिणाम होती है।
अगर हम अपने पर और अपनी क्षमताओं पर पूर्ण विश्वास करते हैं तो हिचकिचाहट हो ही नहीं सकती है।
अतः अपने काम पर पूरी तरह एकाग्रह हों और कार्य करने की आपकी कार्यप्रणाली पर पूरा भरोषा रखें , आपको सफलता जरूर मिलेगी।
जोखिम उठाने से ही तरक्की के नए - नए रास्ते निकलते हैं। जोखिम लेने से ही हम कुछ नया सीख सकते हैं , नयापन महसूस कर सकते हैं ; इसके कारण हम जीवन में विशेष परिवर्तन ला सकते हैं , जिसके कारण ही हमारी सफलता सुनिश्चित होगी।
जोखिम लेने से ही हम अपने में महत्वपूर्ण और सकारात्मक व्यक्तित्व पा सकते हैं और लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं।
अगर हम जोखिम नहीं उठा सकते हैं तो हम प्रगत्ति भी नहीं कर सकते हैं और हमारा जीवन भी निरर्थक हो जाएगा , हम जीवन भी ठीक से नहीं जी पाएंगे।
जो लोग जोखिम नहीं उठाना चाहते , वे पूर्ण निश्चितता की भावना से बंध जाते हैं। वे अपने ही नकारात्मक विचारों के गुलाम बन जाते हैं , वे अपने विचारों व कार्यों को करने की स्वतंत्रता खो देते हैं। जो व्यक्ति जोखिम उठाता है , वास्तव में वही सभी खतरों से मुक्त रहता है।
हर कार्य अपनी सफलता के लिए समर्पण , धैर्य , मेहनत - एक प्लान के साथ और आत्मविश्वास की कामना करता है ।
समस्याओं से भागने से समस्या दूर नहीं होती है ,उल्टा समस्या और बड़ी बनकर हमारे मार्ग को अबरुद्ध कर देती है । इसलिए समस्या का सामना आत्मविश्वास के साथ करो और समस्या का कारण खोजकर उसे दूर करने का प्रयास करो ।
जीवन में कुछ भी करना असंभव नहीं है ; अगर हमारे विचार उच्च हों और हम कार्य के प्रति समर्पित हों ।
कोई कार्य आरम्भ करने के बाद उसकी सफलता के बारे में ही सोचो .अगर तुम्हारी लगन और प्लान सही है ; तो सफलता निश्चित है ; तो फिर हम अनचाही असफलता के बारे में क्यों सोचें ।
जो कार्य आपने सोचा है ; उसे जितना जल्दी हो सके आरम्भ कर दो । आज का काम कल पर मत टालो ।
हमेशा अपने मन की सुनो, दूसरों को देखना और सुनना बंद कर दो ; नहीं तो तुम्हारे अनचाहे डर और शर्म से तुम्हारे सारे प्लान पानी में मिल जाएंगे और तुम्हें घोर निराशा का सामना करना पड़ सकता है ।
हर कार्य पूरे विचार के साथ , अच्छे प्लान के साथ पूर्ण आत्मविश्वाश के साथ आरम्भ कर दो । छोटी छोटी समस्याओँ को देखकर अपने कार्य के प्लान को न बदलो और न निराश हों ; आई कठिनाई का कारण जानकर,उनका समाधान खोजो और दुगुने उत्साह के साथ लग जाओ । सफलता तुम्हारे कदमो में होगी ।
सिर्फ जोखिम लेने और सपने देखने से काम नहीं बनेगा , हमें जोखिम उठाकर नए कार्य की योजना बनानी होगी और उस पर क्रमबद्ध तरीके से कठोरता के साथ आगे बढ़ना होगा। हमें आत्मविश्वास के साथ ,नई जानकारियाँ सीखनी होंगी और कठोर परिश्रम भी करना होगा ,तभी हमारे सपने और योजना सफल हो सकती है।
No comments:
Post a Comment