योग_ध्यान_साधना से सफ़लता
यहाँ आप योग, ध्यान और साधना के साथ-साथ सफ़लता के मूल ज्ञान को पा सकते हो ! हमारा उद्देश्य आपको सत्य ज्ञान तथ्यों के साथ देना है; ताकि आप स्वस्थ तन, और मन के साथ-साथ सफ़लता के शिख़र तक पहुँच पाएँ !
सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का रहस्य हम सभी लम्बी उम्र के साथ-साथ पूर्ण स्वस्थ, और तनाव रहित, तथा बिना किसी दर्द को लिए जीवन जी सकते हैं I हाँ ! यह कोई कौरी कल्पना नहीं-- हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों, और हमारे प्राचीन ग्रंथों के वैज्ञानिक प्रमाणित सत्य हैं; जिनको अपनाकर, और स्वयँ के अन्तर्मन के विश्वास, तथा मानसिक भावनाओं को बदलकर; हम श्वासों के माध्यम से चेतना जाग्रत्त करके हर पुराने दुःख-दर्दों, अन्तर-शरीर में दबे क्रोध तथा कुंठाओं-अवसादों को जीवन से सदा सदा के लिए दूर कर सकते हैं I साथियों समझने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि-- आज आपके जो भी डर, दर्द और चिंताएँ या मानसिक और शारीरिक दिक्कतें हैं-- उनको आपने जन्म नहीं दिया है-- ये तो आपके पूर्वजों के दुःख, दर्द, क्रोध और अवसाद हैं-- जिनको आप आज भी जाने-अनजाने ढ़ोते आ रहे हो I ये आपके पूर्वजों द्वारा झेले गए वे शारीरिक और मानसिक डर, क्रोध और दर्द हैं-- जिनको पूर्वजों ने झेला, और लम्बे समय तक महसूस किया था | जिनके कारण उनके शरीर में इनसे बचने के लिए शारीरिक परिवर्तन हो गए थे-- जिनकी उस समय ...
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चिंता l चिंतन l चिंता-चिंतन l worry l concerns l मनन
6. किसी भी परेशानी या रुकावटों का सामना हम विश्वास के
साथ या चिंता के साथ कर सकते हैं-
यह सब स्वयँ पर ही निर्भर करता है। अतः; अगर ख़ुशी के साथ
सफ़लता चाहिए; तो नकारात्मक भावों से बचते हुए चिंताओं के समाधानों पर दृढ़-संकल्प के
साथ प्रयास करें; लेकिन निराशा और चिंता से दूर रहें।
इसकी चिंता छोड़ दो कि कुछ गलत भी हो सकता है। अगर हम सफ़ल
होने की कामना के साथ आत्म-विश्वास से सही योजना के साथ निश्चित लक्ष्यों पर मेहनत
करेंगे तो सफ़लता ना मिले ऐसा हो ही नहीं सकता है।
लेकिन इसके लिए सजगता के साथ कठोर परिश्रम तो करना ही होगा
और आलश्य भी त्यागने ही होंगे।
7. अपनी कल्पनाओं को डर की भावनाओं की बजाय सकारात्मक उपायों
पर लगाएँगे; तभी समाधानों पर ठन्डे दिमाग़ से आत्म-विश्वास के साथ चल पाओगे।
चिंता के भाव रखोगे; तो अवसाद के साथ-साथ कायरता, निराशा,
खिन्नता, बैचेनी और मानसिक बीमार ही बनते जाओगे।
चिंता करने से लाभ कभी भी ना होगा; बल्कि आप और हानि की
दिशा में ही बढ़ते जाओगे।
8. चिंताग्रस्त होने पर समस्याओं का सामना करना मुश्किल
हो जाता है।
अतः चिंता की बजाय चिंतन-मनन करके समाधानों की दिशा में
आगे बढ़ें; लेकिन फ़ल या सफ़लता कब मिलेगी; इसकी चिंता कभी ना करें।
हमारा कार्य और ध्यान मात्र लगातार प्रयास करने और स्वयँ
को उन्नत करते जाने पर होना चाहिए; तभी समस्याओं के समाधानों के साथ-साथ चिंता-मुक्त
रह सकते हैं।
9. अधिक चिंतित होना हमारे कमज़ोर आत्म-विश्वास, हमारी लाचारी,
अज्ञानता को प्रदर्शित करता है।
धैर्य, सहनशीलता, और संघर्ष की शक्ति के बल पर हम तनाव,
चिंता, बेचैनी से बचे रह सकते हैं।
सकारात्मक-सोच के साथ नकारात्मक-विचारों और डरों को कम
करना आसान होता है।
10. हमें सुख-दुःख दोनों पलों को समभाव के साथ सहन करना
आना चाहिए।
कभी भी सफलताओं के कारण इतने अभिमानी भी ना बनो कि आगे
बढ़ना ही छोड़ दो; असफ़ल होने पर भी सकारात्मक भाव से पुनः सफ़ल होने की दिशा में अथक प्रयत्न
बिना निराशा और चिंता के करते रहें।
हमें भूतकाल का दुःख नहीं करना चाहिए और भविष्य को सफ़ल,
सम्बृद्ध बनाने के लिए वर्तमान में सार्थक प्रयास करते रहना चाहिए।
कभी भी मुसीबतों से घबराकर लक्ष्यों से समझौता नहीं करना
चाहिए। गलत परिस्थितियों को सफ़लता में रूपान्तरित करने के लिए संघर्ष करो; लेकिन पलायन
के बारे में कभी ना सोचो।
दृढ़-संकल्प के साथ परिश्रम सही दिशा में करते रहें; सही
समय पर सफ़लता जरूर मिलेगी।
आत्म-नियंत्रित
होकर, धैर्य के साथ, अच्छे समय की कामना के साथ लगातार स्वयँ को उन्नत्तिशील बनाते
जाएँ; तभी हम चिंता-मुक्ति के साथ-साथ ख़ुशी भी प्राप्त करेंगे।
DEEP BREATHING आप कभी भी बीमार नहीं पड़ोगे; अगर आपने अपनी 24 घण्टे चल रही सांसों को साधना सीख लिया ! यह एक वैज्ञानिक प्रमाणित तथ्य है कि कोई भी प्राणी जो सांसों को नाभि तक गहरी-लम्बी लेगा और जितना धीमा साँस बाहर ज्यादा समय ख़र्च करते हुए छोड़ेगा; उसकी आयु उतने गुणा ही बढ़ती जाएगी ! लम्बी-गहरी नाभि तक ली गई प्रत्येक सांस सीधे हमारी नाड़ियों तक पहुंचकर हमारी प्रत्येक कोशिकाओं को सही मात्रा में पोषित और ऊर्जावान बना सकती है ! इसके साथ ही ज्यादा देर में धीमी गति से साँस छोड़ने से शरीर में प्राणवायु लेने के लिए वैक्यूम बनेगा, और हम अधिक प्राणवायु लेने की योग्यता हाँसिल करेंगे, और शरीर में भरपूर प्राणवायु प्राण-ऊर्जा के रूप में एकत्रित होगी; इससे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी तथा शरीर के खून में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ेगा; जिनके फलस्वरूप शरीर स्वस्थ और शक्तिशाली बनता चला जाएगा ! जितना ज्यादा समय साँस लेने और छोड़ने का होगा उतना ही हमारी स्वास की दर कम होगी; जिसका सुफल हमारी दीर्धायु होगी ! ● इसका उदाहरण हमें जापानियों में मिलता है; जो लम्बी-गहरी साँस लेते हैं, और ज्यादा देर में धीमी गति ...
MEDITATION The entire control of our body is under the control of the brain. The control of the brain is through the mind; All control messages go to the entire system from here. Meditation (meditation) is the best way to clear the mind. Meditation also has a positive effect on our subconscious mind, the combined effect of which we can achieve many amazing solutions using positive-speaking (AFFIRMATION). An energy cycle is formed around the body; In which all the diseases, defects of the body are removed by the use of the created world power, there is a feeling of new zeal, new energy, consciousness, enthusiasm in the body. We get wisdom and knowledge. Meditation has the same meaning in all religions; The aim of which is - for the purification of the body, the soul-air enters the body and fulfils concentration, enthusiasm. In the initial state of meditation there are the following main stages : - ...
Personality Development :-- Personalities are characteristics inside ourselves, which we keep from birth. Our family environment, their ways of living, our family behaviour, emotions and their values have a lot of influence on personality. Our gestures, our manner of speech, our dress, our attractiveness, character, our emotions, our thoughts, abilities, interests, attitude, behaviour, our attitude, our way of trying and our confidence. Our personality is the main identity. Our personality can never match with others, because everyone's culture and family environment and promotions are never the same. These characteristics give us a different identity (unik) from others. Our personality is of two types; External personality and internal personality. Our external appearance, our way of life, our body language, our ways of talking, our way of walking; Are reflective of our external personality. Our emotions, our perspectiv...
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