विचार, मन और भावनाएँ हमारे मस्तिष्क की एक स्वाभाविक क्रियाएँ हैं I

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 विचार, मन और भावनाएँ हमारे मस्तिष्क की एक स्वाभाविक क्रियाएँ हैं l CONTROL YOUR BREATHING TO CONTROL MIND  हाँ ! मस्तिष्क से उठे तरह-तरह के अलग-अलग विचारों का जाल ही मन है I  मन अस्तित्वहीन है; जिसे हम दिल की गहरी भावनाओं के साथ जोड़कर खुश भी होते रहते हैं, या कभी कभी इतने दुखी, और निराश भी हो जाते हैं कि सब कुछ अशांत-दुखी, और बैचेन हो जाता है I  अतः; अगर आपको हर क्षण ख़ुशी-शांति, और तरक्की को अनुभव करते हुए पूर्ण स्वस्थ और सुखमय जीवन चाहिए-- तो स्वयँ को समझना, और स्वयँ को समय देकर अपने अंतर्मन की भावनाओं-विचारों, और तीब्र-इच्छाओं को विवेकशीलता के साथ समझना शुरू कर दो I  मन के जाल में ना फँसो; बल्कि बुद्धि का उपयोग करें, और मन में चल रहे विचारों का आत्मावलोकन शाँति, और धैर्य बनाए रखते हुए करें; तभी आप सही निष्कर्षों पर पहुँच कर सही निर्णय ले पाएँगे I  इससे हर कार्य सफ़ल भी होंगे, और आप हर प्रकार के तनाबों, तथा चिंताओं से भी बचे रहेंगे I मन क्या है ? ख़ुशी के साथ तनाबमुक्त सफलता पाने का रहस्य ● निम्न हिंदी वीडियो आपके लिए हितकर होंगे; कृपया चिंतन-मनन के साथ उपय...

अत्यधिक सोच l OVER THINKING

          अत्यधिक सोच ( OVER THINKING )


        " ऐसी बात या घटना के बारे में अत्यधिक सोचना ,जिनका कोई अस्तित्व न हो , जिनकी हम फिजूल ही चिंता करने लग जाते हैं और जिनसे निकलने का कोई मार्ग नहीं दिखता है
ये वे हमारे मन की बनी नकारात्मक और डर से भरी  सोच हैं ; जो कि न तो कभी समस्या थी और न ही होने की कोई गुंजाईश है। इन्हे ही हम ओवर थिंकिंग ( अत्यधिक सोचना ) कहते हैं 


          किन्ही नकारात्मक बातों के बारे में हद से ज्यादा सोचते रहना और अनचाहे डर और आक्रोश में उलझे रहना हमारे उज्जवल भविष्य ,सफलता और स्वस्थ्य के लिए हानिकारक है।

इससे हम अपने दिमाग को सही दिशा में एकाग्रः नहीं कर पाते है, चिंता व नकारात्मक विचार हमें एक अनचाहे  डर और आक्रोश की और ही ले जाते हैं

इन्ही नकारात्मक सोच व फिजूल  के भय के कारण हम कार्य को मुश्किल बना लेते हैं
 हमें अनुत्साह का,खिन्नता का अनुभव होने लगता है
 
          अत्यधिक नकारात्मक सोच के कारण हमारा आत्म-विश्वास कम होता है, हमारे मन में बैचेनी बढ़ती है और हमारे रक्त-प्रवाह में दिक्कत हो सकती है
 

         यह एक बुरी आदत या लत ( HEVIT और ADICTION ) है
         अत्यधिक सोच हमारी रचनात्मक शक्ति को कमजोर  करेगी

          अत्यधिक सोच को हम ऐसे समझ सकते हैं कि इस आदत में हम बीते समय में हो चुकी घटनाओं और भूलों के बारे में या भविष्य में आने वाली काल्पनिक समस्याओं के बारे में ऐसे विचार करते है ; जैसे वे अभी घट रही हों और हमारा सारा सत्यानाश हो गया है
हम पसीने - पसीने हो रहे हैं ; लेकिन निकलने का कोई मार्ग नहीं दिख रहा है
इस समय हम अपने को ही समझा रहे होते हैं कि अगर मैं ऐसा करता तो सब अच्छा हो जाता, मैनें  ऐसा क्यों नहीं  किया ? अब अगर ऐसा होगा ,तो में ऐसा करूँगा आदि- आदि



इस अत्यधिक नकारात्मक सोच की बुरी आदत से बचने का एक ही उपाय है-


        सकारात्मक सोच के साथ वर्तमान में जिओ और पहले क्या हुआ था और आगे क्या होगा की नकारात्मक बातों से जितना जल्दी हो सके दूरी बना लो

        जो हो चुका उसे याद करके हम हमारा समय ही बर्वाद कर रहे  हैं -- ये हम अच्छे से  जानते हैं

अतः सकारात्मक सोच के साथ ; वर्तमान में नई योजना और उसकी सफलता के बारे में सोचें मिलने वाली उपलब्धियों के बारे मै कल्पना करें और सोचें- इन सबके बाद तुम्हारे अगले लक्ष्य और सपने क्या होंगे
 
        ये ही वे बातें हैं ,जो तुम्हे प्रेरित करेंगी ; तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य को  पूरा करने की

        तुम्हारे उत्साह और आत्म-विश्वास को कभी कम न होने दें

         हमेशा वास्तविकता में जिओ, कार्य के बारे में सकारात्मक विचार रखो

        हमें समाधान-जनक विचार करने चाहिए और आने वाली परेशानियों  के समाधान और हमारी नई योजना में नए संशोधनों  के बारे विचार करना चाहिए , ताकि हमारी सफलता सुनिश्चित हो सके और हमारे सपने पूरे हो सके

        हमें सोच का नजरिया सकारात्मक बनाना ही होगा हमें हमारे मन को काबू में रखना ही होगा , जिससे हम अति-विचार से बच सकें



संक्षेप में हमें निम्न बातों पर विचार और अमल करना चाहिए ,जिससे हम अत्यधिक नकारात्मक सोच से बचे रह सकें :--


1. किसी भी लक्ष्य को पूर्व -निर्धारित योजनानुसार करें और अपनी योजना और स्वयं पर पूर्ण-विश्वास रखें

2. समय का सदुपयोग करें और खुद को सकारात्मक कार्य में व्यस्त रखें ,इससे तुम्हारा मन नकारात्मक विचारों के लिए खाली ही नहीं होगा

3. रोज सुबह उठने पर और रात को सोने से पहले ध्यान लगाएं (Meditation), इससे मन शांत रहेगा और मन में आत्मविश्वास बढ़ेगा , सकारात्मक भाव जाग्रत होंगे

ध्यान करते समय सोच सकारात्मक रखें

4. अगर कभी हीनता के भाव आएं या तुम्हें किसी बात में चिंता सताए तो इस समय उन कारणों पर विचार करें, जिनके कारण तुम्हारी भावनाएं प्रभावित हों रही हैं

इन पर सकारात्मक दृष्टिकोण  से सोचें और थोड़ा पीछे के समय में जाकर सोचें और इनके प्रभाव को वर्तमान पर न पड़ने दो आगे के लिए बिना विचार कोई राय नहीं बनायें; कोई राय बनाने से पहले समस्या पर पूरा विश्लेषण करें

5. हमारे मन - रुपी अंदर के दुश्मन को काबू में रखना होगा , तो बाहर कोई दुश्मन होगा ही नहीं

6. हमेशा सकारात्मक बने रहने के लिए सकारात्मक पुस्तकें ,अन्य सकारात्मक जानकारियां पढ़ें , विचार करें
 
7. वर्तमान में जियें
   भूत काल में हों चुकी भूलों को याद करके समय बर्बाद न करें ,भविष्य के संभावित भय को सोचने से बचें

8. जीवन का निश्चित लक्ष्य बनायें तथा उस पर पूर्ण विश्वास के साथ  कार्य करें

    सकारात्मक जोखिम (Risk) लेना सीखें खुद से नकारात्मक बातें करने से बचें

    खुद को जहाँ तक हो सके ; सकारात्मक कार्य में व्यस्त रखें

    आप वह कार्य जरूर करें,जो  आप व आपका दिल करना चाहता है फिजूल की चिंता छोड़ें , सकारात्मक कार्य में व्यस्त रहें

9. दूसरों को माफ़ करना सीखें

10. किसी पर निर्भर न रहें , खुद पर विश्वास रखें और सकारात्मक ही सोचें
 









 




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