सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का रहस्य I The Secret Of Complete Physical & Mental Health In Hindi I Purbajon Ki Gaston Ko Kholen I Swath Jeevan Payen

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सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का रहस्य   हम सभी लम्बी उम्र के साथ-साथ पूर्ण स्वस्थ, और तनाव रहित, तथा बिना किसी दर्द को लिए जीवन जी सकते हैं I  हाँ ! यह कोई कौरी कल्पना नहीं-- हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों, और हमारे प्राचीन ग्रंथों के वैज्ञानिक प्रमाणित सत्य हैं; जिनको अपनाकर, और स्वयँ के अन्तर्मन के विश्वास, तथा मानसिक भावनाओं को बदलकर; हम श्वासों के माध्यम से चेतना जाग्रत्त करके हर पुराने दुःख-दर्दों, अन्तर-शरीर में दबे क्रोध तथा कुंठाओं-अवसादों को जीवन से सदा सदा के लिए दूर कर सकते हैं I   साथियों समझने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि-- आज आपके जो भी डर, दर्द और चिंताएँ या मानसिक और शारीरिक दिक्कतें हैं-- उनको आपने जन्म नहीं दिया है-- ये तो आपके पूर्वजों के दुःख, दर्द, क्रोध और अवसाद हैं-- जिनको आप आज भी जाने-अनजाने ढ़ोते आ रहे हो I  ये आपके पूर्वजों द्वारा झेले गए वे शारीरिक और मानसिक डर, क्रोध और दर्द हैं-- जिनको पूर्वजों ने झेला, और लम्बे समय तक महसूस किया था | जिनके कारण उनके शरीर में इनसे बचने के लिए शारीरिक परिवर्तन हो गए थे-- जिनकी उस समय ...

अत्यधिक सोच l OVER THINKING

          अत्यधिक सोच ( OVER THINKING )


        " ऐसी बात या घटना के बारे में अत्यधिक सोचना ,जिनका कोई अस्तित्व न हो , जिनकी हम फिजूल ही चिंता करने लग जाते हैं और जिनसे निकलने का कोई मार्ग नहीं दिखता है
ये वे हमारे मन की बनी नकारात्मक और डर से भरी  सोच हैं ; जो कि न तो कभी समस्या थी और न ही होने की कोई गुंजाईश है। इन्हे ही हम ओवर थिंकिंग ( अत्यधिक सोचना ) कहते हैं 


          किन्ही नकारात्मक बातों के बारे में हद से ज्यादा सोचते रहना और अनचाहे डर और आक्रोश में उलझे रहना हमारे उज्जवल भविष्य ,सफलता और स्वस्थ्य के लिए हानिकारक है।

इससे हम अपने दिमाग को सही दिशा में एकाग्रः नहीं कर पाते है, चिंता व नकारात्मक विचार हमें एक अनचाहे  डर और आक्रोश की और ही ले जाते हैं

इन्ही नकारात्मक सोच व फिजूल  के भय के कारण हम कार्य को मुश्किल बना लेते हैं
 हमें अनुत्साह का,खिन्नता का अनुभव होने लगता है
 
          अत्यधिक नकारात्मक सोच के कारण हमारा आत्म-विश्वास कम होता है, हमारे मन में बैचेनी बढ़ती है और हमारे रक्त-प्रवाह में दिक्कत हो सकती है
 

         यह एक बुरी आदत या लत ( HEVIT और ADICTION ) है
         अत्यधिक सोच हमारी रचनात्मक शक्ति को कमजोर  करेगी

          अत्यधिक सोच को हम ऐसे समझ सकते हैं कि इस आदत में हम बीते समय में हो चुकी घटनाओं और भूलों के बारे में या भविष्य में आने वाली काल्पनिक समस्याओं के बारे में ऐसे विचार करते है ; जैसे वे अभी घट रही हों और हमारा सारा सत्यानाश हो गया है
हम पसीने - पसीने हो रहे हैं ; लेकिन निकलने का कोई मार्ग नहीं दिख रहा है
इस समय हम अपने को ही समझा रहे होते हैं कि अगर मैं ऐसा करता तो सब अच्छा हो जाता, मैनें  ऐसा क्यों नहीं  किया ? अब अगर ऐसा होगा ,तो में ऐसा करूँगा आदि- आदि



इस अत्यधिक नकारात्मक सोच की बुरी आदत से बचने का एक ही उपाय है-


        सकारात्मक सोच के साथ वर्तमान में जिओ और पहले क्या हुआ था और आगे क्या होगा की नकारात्मक बातों से जितना जल्दी हो सके दूरी बना लो

        जो हो चुका उसे याद करके हम हमारा समय ही बर्वाद कर रहे  हैं -- ये हम अच्छे से  जानते हैं

अतः सकारात्मक सोच के साथ ; वर्तमान में नई योजना और उसकी सफलता के बारे में सोचें मिलने वाली उपलब्धियों के बारे मै कल्पना करें और सोचें- इन सबके बाद तुम्हारे अगले लक्ष्य और सपने क्या होंगे
 
        ये ही वे बातें हैं ,जो तुम्हे प्रेरित करेंगी ; तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य को  पूरा करने की

        तुम्हारे उत्साह और आत्म-विश्वास को कभी कम न होने दें

         हमेशा वास्तविकता में जिओ, कार्य के बारे में सकारात्मक विचार रखो

        हमें समाधान-जनक विचार करने चाहिए और आने वाली परेशानियों  के समाधान और हमारी नई योजना में नए संशोधनों  के बारे विचार करना चाहिए , ताकि हमारी सफलता सुनिश्चित हो सके और हमारे सपने पूरे हो सके

        हमें सोच का नजरिया सकारात्मक बनाना ही होगा हमें हमारे मन को काबू में रखना ही होगा , जिससे हम अति-विचार से बच सकें



संक्षेप में हमें निम्न बातों पर विचार और अमल करना चाहिए ,जिससे हम अत्यधिक नकारात्मक सोच से बचे रह सकें :--


1. किसी भी लक्ष्य को पूर्व -निर्धारित योजनानुसार करें और अपनी योजना और स्वयं पर पूर्ण-विश्वास रखें

2. समय का सदुपयोग करें और खुद को सकारात्मक कार्य में व्यस्त रखें ,इससे तुम्हारा मन नकारात्मक विचारों के लिए खाली ही नहीं होगा

3. रोज सुबह उठने पर और रात को सोने से पहले ध्यान लगाएं (Meditation), इससे मन शांत रहेगा और मन में आत्मविश्वास बढ़ेगा , सकारात्मक भाव जाग्रत होंगे

ध्यान करते समय सोच सकारात्मक रखें

4. अगर कभी हीनता के भाव आएं या तुम्हें किसी बात में चिंता सताए तो इस समय उन कारणों पर विचार करें, जिनके कारण तुम्हारी भावनाएं प्रभावित हों रही हैं

इन पर सकारात्मक दृष्टिकोण  से सोचें और थोड़ा पीछे के समय में जाकर सोचें और इनके प्रभाव को वर्तमान पर न पड़ने दो आगे के लिए बिना विचार कोई राय नहीं बनायें; कोई राय बनाने से पहले समस्या पर पूरा विश्लेषण करें

5. हमारे मन - रुपी अंदर के दुश्मन को काबू में रखना होगा , तो बाहर कोई दुश्मन होगा ही नहीं

6. हमेशा सकारात्मक बने रहने के लिए सकारात्मक पुस्तकें ,अन्य सकारात्मक जानकारियां पढ़ें , विचार करें
 
7. वर्तमान में जियें
   भूत काल में हों चुकी भूलों को याद करके समय बर्बाद न करें ,भविष्य के संभावित भय को सोचने से बचें

8. जीवन का निश्चित लक्ष्य बनायें तथा उस पर पूर्ण विश्वास के साथ  कार्य करें

    सकारात्मक जोखिम (Risk) लेना सीखें खुद से नकारात्मक बातें करने से बचें

    खुद को जहाँ तक हो सके ; सकारात्मक कार्य में व्यस्त रखें

    आप वह कार्य जरूर करें,जो  आप व आपका दिल करना चाहता है फिजूल की चिंता छोड़ें , सकारात्मक कार्य में व्यस्त रहें

9. दूसरों को माफ़ करना सीखें

10. किसी पर निर्भर न रहें , खुद पर विश्वास रखें और सकारात्मक ही सोचें
 









 




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